आईसीटीसी परामर्शदाता महेश कुमार ने एचआईवी संक्रमण, बचाव एवं जोखिम आकलन की दी जानकारी
पुरवा, उन्नाव। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पुरवा के रैन बसेरा परिसर में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर एचआईवी जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार के निर्देशानुसार एवं जिला क्षय रोग अधिकारी के आदेश के क्रम में आयोजित इस कार्यशाला में क्षेत्र की समस्त सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) को एचआईवी के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की अग्रिम पंक्ति की कार्यकर्ताओं को एचआईवी से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और इस जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए उन्हें जागरूक करना रहा।
कार्यशाला के दौरान एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र (आईसीटीसी) के परामर्शदाता महेश कुमार ने उपस्थित एएनएम को एचआईवी संक्रमण से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी। उन्होंने एचआईवी के संभावित जोखिम, बचाव, समय पर जांच, परामर्श तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि समुदाय में एचआईवी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जानकारी लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।
एचआईवी जागरूकता को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण
कार्यशाला में बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने में एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। एएनएम का नियमित रूप से ग्रामीण परिवारों, महिलाओं, किशोर-किशोरियों और अन्य लाभार्थियों से संपर्क रहता है। ऐसे में एचआईवी से संबंधित सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में एएनएम प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों को यह समझाया गया कि एचआईवी से संबंधित किसी भी व्यक्ति के प्रति केवल आशंका या सामाजिक धारणा के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। एचआईवी की स्थिति की जानकारी निर्धारित स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी के परामर्श के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है। स्वास्थ्यकर्मियों से यह भी कहा गया कि एचआईवी से संबंधित जानकारी देते समय व्यक्ति की गोपनीयता, सम्मान और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी भय या संकोच के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सके।
क्यूआर कोड के माध्यम से किया स्वयं जोखिम आकलन
कार्यशाला के दौरान डिजिटल माध्यम का भी प्रयोग किया गया। उपस्थित सभी एएनएम ने क्यूआर कोड के माध्यम से स्वयं जोखिम आकलन किया। इस गतिविधि का उद्देश्य प्रतिभागियों को एचआईवी से जुड़े संभावित जोखिमों को समझने तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग करने के प्रति जागरूक करना रहा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह संदेश दिया गया कि स्वयं जोखिम आकलन जागरूकता का एक माध्यम है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी आशंका होने पर निर्धारित स्वास्थ्य केंद्र पर जांच एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से उचित परामर्श लेना आवश्यक है।
इस गतिविधि के माध्यम से एएनएम को यह भी समझने का अवसर मिला कि डिजिटल साधनों का उपयोग कर स्वास्थ्य जागरूकता को किस प्रकार अधिक व्यापक बनाया जा सकता है।
एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने पर जोर
कार्यशाला में एचआईवी को लेकर समाज में मौजूद विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया कि एचआईवी के संबंध में अफवाहों और अपुष्ट जानकारी के बजाय वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जानकारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एएनएम को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को एचआईवी के संबंध में जागरूक करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि एचआईवी से संबंधित लोगों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। कार्यशाला में इस बात पर जोर रहा कि जागरूकता का उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें सही जानकारी देकर सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार के लिए प्रेरित करना है।
गोपनीयता और सम्मान को बताया आवश्यक
एचआईवी से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में गोपनीयता और संवेदनशीलता का विशेष महत्व है। कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को इस विषय पर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। एएनएम को समुदाय के बीच संवाद करते समय संवेदनशील भाषा का प्रयोग करने तथा जरूरतमंद लोगों को उचित परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
अधिकारियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि रहे मौजूद
सीएचसी पुरवा के रैन बसेरा परिसर में आयोजित कार्यशाला में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (एमओआईसी) डॉ. प्रमोद कुमार, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) शिवाकांत तिवारी, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम) इसहाक अली, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ब्लॉक समन्वयक आलोक श्रीवास्तव तथा यूनिसेफ प्रतिनिधि वीरेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने एएनएम से संवाद करते हुए एचआईवी जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। कार्यशाला में क्षेत्र की समस्त एएनएम ने प्रतिभाग किया और उन्हें समुदाय में एचआईवी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आवश्यक जानकारी दी गई।
गांव-गांव तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश
स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर आयोजित इस प्रकार की कार्यशालाओं का उद्देश्य जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करना है। एएनएम ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे लोगों के संपर्क में रहती हैं, इसलिए उन्हें एचआईवी के संबंध में प्रशिक्षित और जागरूक करने से स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी अधिक व्यापक स्तर पर पहुंचाई जा सकती है।
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एचआईवी से संबंधित जागरूकता केवल एक दिन का अभियान न रहकर निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए। स्वास्थ्यकर्मियों को अपने नियमित क्षेत्रीय भ्रमण और सामुदायिक संपर्क के दौरान भी लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
समय पर जानकारी और जांच से बढ़ेगा भरोसा
कार्यशाला में बताया गया कि एचआईवी के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए लोगों को सही समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। किसी व्यक्ति को जोखिम की आशंका होने पर उसे डरने या सामाजिक दबाव में आने के बजाय निर्धारित स्वास्थ्य केंद्र से जांच और परामर्श प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह संदेश भी दिया गया कि एचआईवी से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, गोपनीयता और सम्मान का ध्यान रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।
कार्यशाला का उद्देश्य—जागरूक स्वास्थ्यकर्मी, जागरूक समाज
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यशाला के माध्यम से एएनएम को एचआईवी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें समुदाय में सही स्वास्थ्य संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी से जोड़ा गया। क्यूआर कोड के माध्यम से स्वयं जोखिम आकलन जैसी गतिविधि ने कार्यशाला को डिजिटल जागरूकता से भी जोड़ा।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि एचआईवी के प्रति सही जानकारी, समय पर जांच, उचित परामर्श और भेदभाव से मुक्त व्यवहार जागरूक समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, आईसीटीसी परामर्शदाता तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित कार्यशाला में समस्त एएनएम की सहभागिता रही।
ग्रामीण दृष्टि संवाददाता | जनक कुमार सिंह पुरवा, उन्नाव
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